Monday, August 26, 2024

RAJESH KUMAR DESI BLOGG हिम समाधि


हिम समाधि

सियाचिन का नाम सायद किसी ने नही सुना न हो ऐसा सम्भव नही । किसी भी सैनिक के बारे में अगर आप किसी अन्य आर्मी पर्सनल को बतायाएगे कि उसने सियाचिन में तैनाती दी है जो इस सैनिक के बारे एक शानदार नजरिया बन जाता है। मुझे गर्व है मेरे स्वर्गीय पूज्य् पिताजी सियाचिन में रहकर सकुशल सेवानिवृत हुए इसी तरह कुमाऊ या गढ़वाल के लोग आर्मी में अपना योगदान दुर्गम इलाकों सेवा देते रहे है कुछ लोग इन इस परिस्थिति में से निकल कर आ जाते है और कुछ बदकिस्मती से मौसम की चपेट में आकर या देश की सीमा मे वीरगति को प्राप्त हो जाते है।

इस कहानी को मै भी कई दिनों लिखना चाह रहा था सायद मै 6 साल का समय था मुझे याद है ये उस समय की बात है जब कोई टेलिकॉम सुविधा नही थी संचार का माध्यम केवल चिठ्ठी या टेलीग्राफ संदेश। टेलिग्राम्राम भी सिर्फ अंग्रेजी मे और अंग्रेजी पढ़ने वाले भी विरले और अगर किसी तरह पढ ले तो समझा न पाये।
अचानक एक टेलिग्राम आता है लेकिन उस टेलिग्राम को या तो पोस्टमैन पढ़ने में असमर्थ था या पढना ही नही चाहता था। लेकिन आभास सभी को हो जाता है कि कुछ अच्छी खबर नहीं थी । शाम तक कोई पडने वाला ढूढ लिया जाता है जिसमें कुछ ऐसा लिखा था कि सियाचिन में हिम भूस्खलन के कारण गजेन्द्र दब गये है तलाश जारी है। इस खबर को सुनकर पूरे गांव में सन्नाटा छाया गया जाहिर सी बात है सब दुखी थे लेकिन सभी को यकीन था कि सायद कुछ चमत्कार हो गजेन्द्र जिन्दा हो जो कि बर्फ के तूफान में भटक गया हो मिल जायेगा लेकिन यह भी। कि सायद नही।
 रात को लोग आजमा रहे थे एक धारणा थी अगर पानी में सरसों का तेल भगवान् का नाम लेकर गजेन्द्र को याद कर पानी में डाली जाय तो पानी में तेल तैरने लगेगा सायद चिन्नितित और दुखी मन को दिलासा देने का एक अच्छा तरीका था। लेकिन दो दिन बाद एक तार और तार आता है जिसमें यह संदेश था कि गजेन्द्र अब जिन्दा नही रहे जो एक जांबाज सिपाही थे।

जब भी मैं किसी भी सिपाही की सीमा में इस तरह या अन्य तरीके से मृत्यु होती है और कुछेक घटनाओं को मुख्य मिडिया या फेसबुक पर किसी सिपाही हीरो को बताया जाता है या कुछ एक केसेज में लाखों या करोड़ों रुपये मृत्यकु युक के परिवार मिल जाते है जिसमेंसमे से कुछ राज्य सरकारें देती है और कुछ केन्द्र सरकार बाकी सेना नियमानुसार जबकि कुछ परिवार असहाय छोङ दियो जाते है । मुझे दो घटनायें याद आती है।
गजेन्द्र के घर में दो बहने थी और एक छोटा भाई था।
गजेन्द्र 21 साल की उम्र सेना में भर्ती हो जाता है और अपने परिवार को पालता है और हर महिने मनी आर्डर से पैसा भेजता है भाई और बहन भी स्कूल जाते है। कुछ समय बाद उसकी शादी हो जाती है। उसका परिवार बहुत खुश रहता है शादी के एक महिने तक गजेन्द्र घर में ही रहता है और छुट्टियां खत्म होने के बाद सियाचिन में ड्यूटी देने चल देता हैं लेकिन उसकी किस्मत में तो इतनी जल्दी देश के लिये शहीद होना लिखा था और उसकी दुल्हनिया को शादी के चन्द दिनो में बेवा होना। आखिर गजेन्द्र इस दुनिया को अलविदा कह दिया और एक हसता खेलता परिवार असहाय हो गया ।
बात यही खत्म नही होती शायद उस समय मुझे भी इस बात का अहसास नही था उस समय की परिस्थितियाँ एक परिवार को कितनी परेशानी में डाल देती थी और परिवार कैसेै बिखर जाता है। गजेन्द्र की मौत के बाद सायद कोई भी उसकी मदद नही कर्ता। पेंशन के नियमानुसार आधी पेंशन उसकी बिधवा पत्नी को और आधी बुढी मा को मिलना तय हुआ। उसकी पत्नी का मायका गजेन्द्र के घर से लगभग 40 किलोमीटर दूर था और उस समय की सड़कों और बसों में इतनी दूरी भी 2 घंटे से अधिक समय में तय की जाती थी। गजेन्द्र की पत्नी कुछ दिनों बाद अपने मायके चली जातीा है और उसको आधी पैशन का हक मिल जाता है और बाकी उसकी माता जी को। लेकिन यह परिवार दुख झेलना महसुस करने लगता है एक दो साल बाद गजेन्द्र की बड़ी बहन की शादी बडी विचित्र्रत् तरीके से होती है एक ऐसे आदमी से होती है जो पहले ही शादीशुदा होता है और उसकी कोइ पुत्र सन्तान नही होती और इस आदमी:/ की उम्र गजेन्द्र की बहन से लगभग 25 साल अधिक होगी और फिर भी शादी कर दी जाती है जिस आदमी से शादी होती है वह भी गैर पैरा मिलिट्री बल में नौकरी कर्ता है। यहा यह बात सभी को मालूम होनी चाहिये कि हिन्दू मैरिज एक्ट के अनुसार एक पत्नी के होते हुए दूसरी शादी नही कर सकते है।
दूसरी और गजेन्द्र की मा मामूली पेंशन में गुजारा करती है गजेन्द्र की छोटी बहन का स्कूल जाना बन्द हो जाता है और उसका छोटा भाई स्कुल जाता रहता है । उसका छोटा भाई हम उम्र होता है गजेन्द्र की छोटी बहन अपनी मां के काम में हाथ बताती रहती है छोटे भाई और बहन में लगभग चार साल का अन्तर होता है बहन छोटी भाई से बड़ी होती है। समय बितता जाता है मैंने देखा और सुना है लोग अक्सर लोग छोटी बहन को अस्वीकार्य कटाक्ष्ष करते रहते है कभी वे चुप रहती और कभी करारा जबाब दे देती। एक बार गांव में कुछ अच्छे बुजुर्गों बैठे होते है और बोलते है हमारा एक परिवार की तरह है हमें एक दूसरे का सुख दुख में ख्याल रखना चाहिए किसी ने बोला गजेन्द्र की छोटी बहन की मिल-जुल शादी करा देनी चाहिए विचार अच्छा था कुछ चिन्तन हुआ और अन्त में जो उनका करीबी था उनमे से एक ने कहा कि हम तीन भाई ये जिम्मेदारी देने को तैयार है इस प्रकार शादी हो जाती है। यह एक अच्छा होता है
कुछ समय बाद गजेन्द्र की मा का देहान्त हो जाता है और भाई के लिये नयी परेशानी शुरू। उधर गजेन्द्र की बडी बहन जिसकी शादी उसकी बहन की उम्र से दुगुनी से होती है उसके पति की मृत्यु हो जाती है अब सवाल पेंशन का होता है जिसके अनुसार गजेन्द्र की बड़ी बहन को नियमानुसार पेंशन नहीं मिल सकती जो कि सिर्फ कानूनन पहली पत्नी को ही मिल सकती है। अतः उसे अपनी सौतन पर ही निर्भर रहना पड़ता है इसकी एक लड़की भी होती है जो अपनी मां को पसन्द नही करती और बस अपनी बड़ी मा अथवा सौतेली मां के पास रहना पसन्द करती है इसी बीच गजेन्द्र की इस बड़ी बहन एक लडके को जन्म देती है अब उसको कुल्टा या चरित्रहीन्र कहा जाता है उसको समाज से अलग किया जाता है है इसी बीच गजेन्द्र का छोटा भाई पागलपन हो जाता है और आज भी वह पागल है और भीख मांगते है और जब भी भीख मागेगा तब कहेगा सिर्फ एक रुपया दे दो।

इस कहानी के लिए और जो भी हुआ उसके लिये हमारा समाज कितना जिम्मेदारेदारहै !
 मुझे फेसबुक में हर वे पोस्ट आपत्तिजनक लगती है जहा पर किसी शहीद सैनिक की तस्वीरें लायक करने और कमेंट करने से आपकी और मेरी देश भक्ति की परीक्षाक्ष ली जाती है ः कही किसी सैनिक के परिवार के लिये अच्छी आर्थिक मदद हो जाती है और किसी परिवार को असहाय छोड़ दिया जाता है। हमारे कई सैनिक शहीद होते है क्या हम हर एक के लिये समान व्यवहार की बात करते है ।

आगे आप बताये

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